सप्तरी, ११ कातिक : राजविराज बजारमे माइट आ बाँससँ बनल सामग्रीके व्यपार बढ़ल अइछ ।
दिपावली, छैठजेहन पाबैन तिहार लगचिएलाक बाद अइ ठामक श्रद्धालुसभ अनिवार्य माइट आ बाँससँ बनल सामग्री खरिद करबाक कारण उक्त सामग्रीके माँग बढ़ल अइछ ।
दिपावलीमे प्रयोग कएल जाएबला माइटक दिया, कलश, घैला तथा छैठ पाबैनमे प्रयोग कएल जाएबला बाँसके कोनिया, सुप, ढाकीलगायत सामग्रीके माँग दशमीके बाद बढ़ल स्थानीय व्यापारी बुचनी देवी साह जानकारी देलैन ।
ओ कहलैन, “बाँससँ बनल सामग्रीके बिक्री एक दशकसँ क रहल छी । अन्य समयमे ठिक ठाक व्यापार भेलाक बादो दशमीसँ छैठधैर नीक व्यापार होइत छै ।”
अन्य सिजनमे दिनके एक हजार टकाके हाराहारीमे व्यापार होइत एलाक बादो दशमीसँ दिपावलीधैर दोब्बर व्यापार होइत आएल ओ बतौलैन । विवाह, मृत्यु संस्कार, घरमे कएल जाएबला पूजाबाहेक माइट आ बाँसक सामग्री आवश्यकता नै भेलासँ खरिद करबाक बाध्यता नै रहैत अइछ ।
मुदा, दिपावली आ छैठ मधेशमे सब कियो अनिवार्य मनेबाक कारण उक्त सामग्री खरिदबाक बाध्यता रहल राजविराज नगरपालिका वाड नं. २ के ममता झा बतौलैन । मधेशक हरेक पाबैन तिहार तथा पूजामे माइटक बरतन आ बाँसक सामग्री आवश्यक भेलासँ अइ सिजनमे उक्त सामग्रीके व्यावसायिक कारोबार बढ़बाक ओ बतौलैन ।
जिलाके विभिन्न पालिकामे बसोबास करैबला स्थानीय कुम्हार बनौने माइट आ डोम समुदाय बनौने बाँसक सामग्री बजार लेलाक बाद स्थानीयस्तरके लगानी स्थानीयस्तरमे रहनाइ सकारात्मक पक्ष भेल राजविराज नगरपालिकाके प्रमुख इसरत परविन बतौलैन ।
माइट आ बाँससँ बनाएल गेल सामग्री स्थानीय अपने ठामपर खरिदबिक्री करब सकारात्मक पक्ष रहल ओ बतौलैन । बाँस आ माइटक सामग्री खरिदबिक्री करबाक लेल जिलावासीकेँ अन्य जिलापर निर्भर होबाक बाध्यता नै अइछ । (रासस)





